लोकतंत्र बनाम तानाशाही – Ritesh Roy

आज जब हमारा देश लोकतंत्र के रास्ते से भटक चुका है, सरकार तानाशाही पर उतर चुकी है, लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक संस्थाए अपना अस्तित्व खो रही है, देश पूर्णतः विपक्ष विहीन हो चुका है, तब एकमात्र एवं असली विपक्ष की भूमिका JNU के छात्र निभा रहे है और देश चुप है, JNU देश का एकमात्र ऐसा संस्थान है जो सही मायने में लोकतांत्रिक समाजवाद का प्रतिनिधित्व करता है, अगर आपको समतामूलक समाज देखना हो तो आप जेएनयू केम्पस जाइये, जेएनयू देश का एकमात्र ऐसा संस्थान है जहाँ समाज के सबसे निचले तबके के छात्र भी बिना किसी भेदभाव का सामना किये गर्व के साथ पढ़ते है, लेकिन यह सामन्तवादी -पूंजीवादी सरकार जेएनयू के ढांचे एवं उद्देश्य को ही नष्ट करने पर तुली हुई है और देश चुप है।

आज अगर हम नही जागे और चुप बैठे रहे तो देश के एकमात्र शेष बचा विपक्ष भी नष्ट कर दिया जाएगा और देश तानाशाही एवं गृहयुद्ध की ओर एक कदम और आगे बढ़ जाएगा, और आने वाली पीढ़ी हमसे सवाल पूछेगी की जब एक सत्ता के नशे में धुत्त तानाशाह देश को बर्बाद कर रहा था तब आप क्या कर रहे थे ?

इसलिए साथियों अब तो जागो, और जेएनयू के साथ खड़े हो जाओ, क्योंकि अगर जेएनयू पर पूंजीवादियों का कब्जा हो गया तो देश मे लोकतंत्र की अंतिम आशा भी समाप्त हो जाएगी।

Written By — Ritesh Roy

 

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