क्या ईवीएम हैक कर मोदी बने थे प्रधान मंत्री भारतीय मूल के हैकर साइबर एक्सपर्ट शुजा ने किया दावा

क्या ईवीएम हैक कर मोदी बने थे प्रधानमंत्री ? भारतीय मूल के हैकर साइबर एक्सपर्ट शुजा ने किया दावा

ईवीएम फिर से सक के घेरे में आ गयी है इस बार ईवीएम को लेकर भारतीय मूल के हैकर साइबर एक्सपर्ट शुजा ने दावा किया है कि बीजेपी डेटा ट्रांसमीटर के साथ छेड़छाड़ कर चुनाव जीती है और साल 2014 के आम चुनावों में बीजेपी ने ईवीएम में छेड़छाड़ की और सत्ता में आई। हालांकि शुजा ने बीजेपी के अलावा अन्य कई पार्टियों पर हैकिंग का आरोप लगाया जिनमें सपा, बसपा और दिल्ली की आम आदमी पार्टी भी शामिल हैं। शुजा का दावा है कि बीजेपी डेटा ट्रांसमीटर के साथ छेड़छाड़ कर चुनाव जीती है। उसने यह भी कहा कि पूर्व में सपा और बसपा जैसी पार्टियां उससे मिल चुकी हैं और उनकी मांग थी कि हैकिंग का तरीका उन्हें बताया जाए।

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ईवीएम को लेकर भारतीय मूल के हैकर के कथित दावे को भारतीय निर्वाचन आयोग के शीर्ष टेक्निकल एक्सपर्ट डॉ. रजत मूना ने खारिज किया है। उन्होंने हैकर के दावे को बेबुनियाद बताया है। आईआईटी भिलाई के डायरेक्टर और चुनाव आयोग की टेक्निकल एक्सपर्ट कमेटी के मेंबर डॉ. रजत मूना ने कहा है कि ईवीएम मशीनों से किसी भी तरह से छेड़छाड़ नहीं हो सकती। ये मशीनें टेंपर प्रूफ हैं। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनें ऐसी Stand Alone मशीनें हैं, जिनमें किसी भी प्रकार के वायरलेस संचार के माध्यम से छेड़छाड़ नहीं की जा सकती। ये मशीनें टेंपर प्रूफ हैं।

शुजा लंदन में ईवीएम हैक का डेमो करने वाला था लेकिन किसी कारणवश यह टल गया। लंदन में आयोजित इस कार्यक्रम में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल भी मौजूद थे। शुजा ने अपने दावे में कहा है कि बीजेपी नेता गोपीनाथ मुंडे की हत्या हुई न कि सड़क हादसे में उनकी मौत हुई। शुजा का कहना है कि मुंडे को ईवीएम हैकिंग के बारे में जानकारी थी इसलिए उन्हें मार दिया गया। ऐसा ही दावा गौरी लंकेश के बारे में भी किया गया है। शुजा ने कहा कि गौरी लंकेश ईवीएम हैकिंग से जुड़ी खबर करने वाली थीं इसलिए उनकी हत्या हुई।

रिलायंस कम्युनिकेशन पर आरोप लगाते हुए शुजा ने कहा कि इस कंपनी के पास डेटा ट्रांसमिशन के लिए नेटवर्क है और इसका फायदा बीजेपी लेती है । शुजा के मुताबिक, ‘हिंदुस्तान में 9 सेंटर ऐसे हैं जहां से डेटा ट्रांसमिट होते हैं । कर्मचारियों को पता नहीं कि वे क्या कर रहे हैं । उन्हें यही पता होता है कि वे डेटा इंट्री कर रहे हैं ।’

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