Akshaya Tritiya

Akshaya Tritiya – अबूझ मुहूर्त, आखा तीज

अक्षय तृतीया, जिसको की आखा तीज के रूप में भी जाना जाता है। यह चैत्र माह की नहीं बल्कि पुरे साल का सबसे शुभ अवसर है अक्षय तृतीया पर विशेष शुभ मुहूर्त बनता है। इस दिन किसी भी प्रकार का सुबह कार्य किया जा सकता है। अक्षय एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ है “धन, की कमी नहीं होना” और तृतीया का अर्थ है “तीसरा” जो की हिंदी पंचांग की तिथि होती।

आमतौर पर, यह अक्षय तृतीया का त्यौहार हिंदू कैलेंडर के पहले महीने वैशाख या चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष में आता है । अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार, यह तिथियां हर साल अप्रैल या मई के महीने में आती हैं। हिंदू और जैन धर्म के लोगों के लिए यह बहुत विशेष महत्व रखता है क्योंकि इस समुदाय के लिये यह अवसर सबसे महत्वपूर्ण तिथियों में से एक माना है।

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अक्षय तृतीया का महत्व – अबूझ मुहूर्त, आखा तीज

Akshaya Tritiya Importance - अक्षय तृतीया का महत्व - अबूझ मुहूर्त

यह एक विशेष योग या तिथि है जिसका लोग इंतजार करते है अपने किसी शुभ कार्य को करने के लिये जैसे की पूजा पाठ, यज्ञ, शादी, नामकरण, महंगी चीजों जैसे की सोना, घर दुकान, जमीन जायदाद की ख़रीददारी, आदि। अक्षय तृतीया के दिन ये सब करने से इनकी या इनसे होने लाभ की हानि नहीं होती है। अक्षय तृतीया का दिन तरक्की का दिन भी होता है। इस त्यौहार पर भगवान को प्रसन्न करने के लिए भक्ति, दान, धर्म और यज्ञ करना चाहिये। इस दिन शादी करने से दाम्पत्य जीवन में सुख और समृद्ध का प्रसार होता हैं।

अक्षय तृतीया के ठीक बाद लोग जगन्नाथ रथ यात्रा की तैयारी में लग जाते है।

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अक्षय तृतीया पर जैन समुदाय में उत्सव

जैन समुदाय में माना जाता है की अक्षय तृतीया के दिन पहले तीर्थंकर एक लाभ तपस्या समाप्त होने के बाद गन्ने का रास पीते है। इसके अलावा, यह त्यौहार वर्षा तप के नाम से भी लोकप्रिय है।

अक्षय तृतीया के पीछे कहानी

सभी हिंदू त्यौहारों की तरह, अक्षय तृतीया से जुड़ी अलग अलग कहानिया हैं जो इस उत्सव से एक गहरा संबंध रखती हैं। अक्षय तृतीया से जुड़ी का कई हिंदू देवताओ की कहानिया है।

भगवान परशुराम की कहानी – अक्षय तृतीया

पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम का जन्म हुआ था। भगवान परशुराम के बारे में

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भगवान कृष्ण और सुदामा की कथा – अक्षय तृतीया

पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान विष्णु के आठवें अवतार, भगवान कृष्ण से जुड़ी कहानी। कथा क अनुसार इस दिन, भगवान कृष्ण के बचपन के दोस्त सुदामा उनके महल में उनसे मिलने आते हैं। अत्यंत खराब परिस्थितियों में सुदामा, भगवान कृष्ण के लिये भेट स्वरुप मुट्ठी भर चावल लेकर आते हैं।
अपने बचपन के मित्र से भगवान कृष्णा अत्यंत स्नेह के साथ मिलते है। भगवान कृष्ण से मिलने के बाद जब सुदामा आपने घर लौटते हैं और अपनी झोपड़ी की जगह पर एक सुन्दर विशाल महल पाते हैं। उनकी मित्रता और भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान कृष्ण ने उन्हें यह प्रदान किया था। इस प्रकार, जो भी अक्षय तृतीया पर भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा करते है, उसे अद्भुत धन की प्राप्ति होती है।

महाभारत की रचना – अक्षय तृतीया

पौराणिक कथाओं के अनुसार ज्ञान, कला और विज्ञान के देवता भगवान श्री गणेश जी ने महाभारत के का लेखन शुरू किया था । साथ ही के कथा के अनुसार भगवान कृष्ण ने पांडवों और द्रौपदी को अक्षय पात्र दिया, ताकि उनको वनवास के दौरान भोजन कमी न हो सके, ऐसा उन्हें आशीर्वाद दिया था।

देवी अन्नपूर्णा की कहानी – अक्षय तृतीया

पौराणिक कथाओं के देवी अन्नपूर्णा जो देवी पार्वती का अवतार हैं, उनका जन्म अक्षय तृतीया के दिन हुआ था।

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अक्षय तृतीया पूजा अनुष्ठान और उत्सव

अक्षय तृतीया एक विशेष दिन है, घर की साफ सफाई कर के पूजा की जाती है।
इस दिन भक्त भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा करते हैं।
देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु को फल, लाल फूल, तुलसी के पत्ते, कस्तूरी और पंचामृत अर्पित किया जाता हैं।
इसके अलावा, सौभाग्य के लिए, भक्त 11 कोडी के बीज लाल कपड़े में रखते हैं और एक गाँठ बाँधते हैं और भगवान को चढ़ाते हैं। मान्यता के अनुसार ऐसा करने से सुख समृद्धि प्राप्त होती है।

इसके अलावा, मुख्य द्वार पर घी का दीया जलाना अत्यंत समृद्ध माना जाता है।

देश भर में अक्षय तृतीया का उत्सव

अक्षय तृतीया का दिन सतयुग का अंत और त्रेता युग की शुरुवात करता है। इस प्रकार यह एक समृद्ध शुरुआत के रूप में जाना जाता है। भारत के उत्तर और पश्चिम राज्य जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, आदि के आसपास यह विशेष उत्सव मनाया जाता है।

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यह दिन भगवान विष्णु सहित अन्य सभी देवी देवताओ का आशीर्वाद पाने का दिन है, लोग प्रार्थना, आरती और हवन करते हैं।

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