Lord Krishna Mantra

Lord Krishna Mantra

श्रीकृष्ण के चमत्कारी मंत्र, करेंगे हर संकट का अंत

भगवान श्रीकृष्ण की पूजा स्तुति संबंधी मंत्र तो बहुत हैं, लेकिन कुछ खास मंत्रों को ही आप ने सुना होगा जिनको की आज आप यहाँ पढ़ेंगे और उनका महत्व भी जानेगे है। श्री कृष्ण के सरल एवं पौराणिक मंत्र। सभी मंत्र को जपने से पूर्व एक बार ‘जय श्री कृष्णा’ मंत्र का उच्चारण अवश्य करें। Here is the List of Lord krishna Mantra.

भगवान श्री कृष्णा के अन्य मंत्रो से आप भी उनकी स्तुति कर सकते है और कुछ मंत्र जिनक जाप करने से आप के मान और विचार दोनों शुद्ध होते है।

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नाम पढ़े उनके मंत्रो के साथ श्री कृष्णा भगवान के 108 नाम

मंत्रो का यही तो लाभ है की उनके उच्चारण से आप के सभी प्रकार के दुःख और कष्ट दूर होते है आप के जीवन में शांति का वास होता है और आप के मान और विचार पवित्र होते है।

Lord Shri Krishna Mantra – श्री कृष्ण मंत्र

इन मंत्रों से करें कृष्णा जन्माष्टमी पूजन।

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श्री कृष्णा भगवान आप के सभी प्रकार के कष्टों के निवारण करेंगे आप उनके इन मंत्रो के द्वारा पूजा करे।

पढ़े जन्माष्टमी आरती

स्तुति मंत्र

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ऊं श्री कृष्णाय नम:

भगवान श्रीकृष्ण गायत्री मंत्र जो की सर्व कार्य सिद्धि मंत्र भी है

ऊं नारायणाय विद्महे, वासुदेवाय धीमहि, तन्नो कृष्ण: प्रचोदयात

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भगवान श्रीकृष्ण का बीज मंत्र हैं यह मंत्र सभी कष्टों को दूर करने वाला है।

ऊं कृं कृष्णाय नम:

बहुत ही चमत्कारी मंत्र है आठ अक्षरों से बना यह मंत्र आप की इच्छाओं की पूर्ति करता सकता है

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गोकुलनाथाय नम:

भगवान श्री कृष्णा को प्रणाम करने का और कार्य सिद्धि का महामंत्र है

ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नम:

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मन शुद्ध और वाणी पवित्र होती है।

ऊं गोवल्लभाय स्वाहा

आप की आर्थिक विपत्ति को दूर करते हैं

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ऊं क्लीं ग्लौं क्लीं श्यामलांगाय नम:

यह महामंत्र आर्थिक संकट को दूर करता है।

ऊं श्रीं नम: श्रीकृष्णाय परिपपूर्णतमाय स्वाहा

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आप इन कृष्णा मंत्रो से भी आनंद और शुद्धि की अनुभूति करेंगे, आप अपने आप को प्रभु के करीब पाओगे।

  • वसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम्। देवकी परमानन्दं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम।।
  • वृन्दावनेश्वरी राधा कृष्णो वृन्दावनेश्वर:। जीवनेन धने नित्यं राधाकृष्णगतिर्मम।।
  • महामायाजालं विमलवनमालं मलहरं, सुभालं गोपालं निहतशिशुपालं शशिमुखम। कलातीतं कालं गतिहतमरालं मुररिपुं।
  • कृष्ण गोविंद हे राम नारायण, श्रीपते वासुदेवाजित श्रीनिधे। अच्युतानन्त हे माधवाधोक्षज, द्वारकानायक द्रौपदीरक्षक।।
  • अधरं मधुरं वदनं मधुरं नयनं मधुरं हसितं मधुरं। हृदयं मधुरं गमनं मधुरं मधुराधिपतेरखिलं मधुरम्।।

 

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