Saraswati-Puja

Saraswati Puja

विद्या की देवी सरस्वती की पूजा कैसे करे जाने विधि, मंत्र, स्तोत्रम और आरती सरस्वती पूजा और बसंत पंचमी के लिये

माँ सरस्वती की पूजा विधि

सरस्वती माता की आराधन करने के लिए सर्वप्रथम माँ सरस्वती की प्रतिमा को एक स्थान पर विराजमान करे या तस्वीर को सामने रख लें।

उसके बाद कलश स्थापित कर और प्रथम पूजनीय श्री गणेश भगवन जी और नवग्रह अदि की विधिवत पूजा और स्तुति करें और किसी प्रकार की पूजा में भूल को माफ़ करे और अपना आशीर्वाद प्रदान करे ऐसी कामना करे।

अब विद्या और वेदो की देवी माँ सरस्वती का पूजन करें। इसके लिए माँ को स्नान हेतु जल अर्पण करे और नए वस्त्र, सिंदूर, अन्य श्रृंगार की वस्तुएं एवं पुष्प अर्पित करे, पुष्प पीले हो तो बहुत ही अच्छा माना जाता है| माता को चढ़ावे के रूप में आप गुलाब के फूलों का भी प्रयोग कर सकते है।भोग के लिए आप पीले रंग के फलों का इस्तेमाल कर सकते है। अपनी श्रद्धा अनुसार लोग इस दिन दिन खीर और मालपुए का भी भोग लगाते है।

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सरस्वती माता की आरती

आरती श्री सरस्वती जी जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता।

सदगुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥ जय सरस्वती माता॥

चन्द्रवदनि पद्मासिनि, द्युति मंगलकारी। सोहे शुभ हंस सवारी, अतुल तेजधारी॥ जय सरस्वती माता॥

बाएं कर में वीणा, दाएं कर माला। शीश मुकुट मणि सोहे, गल मोतियन माला॥ जय सरस्वती माता॥

देवी शरण जो आए, उनका उद्धार किया। पैठी मंथरा दासी, रावण संहार किया॥ जय सरस्वती माता॥

विद्या ज्ञान प्रदायिनि, ज्ञान प्रकाश भरो। मोह अज्ञान और तिमिर का, जग से नाश करो॥ जय सरस्वती माता॥

धूप दीप फल मेवा, माँ स्वीकार करो। ज्ञानचक्षु दे माता, जग निस्तार करो॥

सरस्वती माता पूजा के लिये मंत्र

  1.  सरस्वती एकाक्षर मंत्र ऐं॥
  2.  सरस्वती द्व्यक्षर मंत्र ऐं लृं॥
  3.  सरस्वती त्र्यक्षर मंत्र ऐं रुं स्वों॥
  4.  सरस्वती दशाक्षर मंत्र वद वद वाग्वादिनी स्वाहा॥
  5.  सरस्वती मंत्र ॐ ऐं नमः॥
  6.  सरस्वती मंत्र ॐ ऐं क्लीं सौः॥
  7.  महासरस्वती मंत्र ॐ ऐं महासरस्वत्यै नमः॥
  8.  सरस्वती मंत्र ॐ ऐं ह्रीं श्रीं वाग्देव्यै सरस्वत्यै नमः॥
  9.  सरस्वती मंत्र ॐ अर्हं मुख कमल वासिनी पापात्म क्षयम्कारी वद वद वाग्वादिनी सरस्वती ऐं ह्रीं नमः स्वाहा॥
  10. श्री सरस्वती पुराणोक्त मंत्र या देवी सर्वभूतेषु विद्यारूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
  11. सरस्वती गायत्री मंत्र ॐ ऐं वाग्देव्यै विद्महे कामराजाय धीमहि। तन्नो देवी प्रचोदयात्॥

॥श्री सरस्वती स्तोत्रम्॥

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना । या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवः सदा पूजिता सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ॥१॥

दोर्भिर्युक्ता चतुर्भिं स्फटिकमणिनिभैरक्षमालान्दधाना हस्तेनैकेन पद्मं सितमपि च शुकं पुस्तकं चापेरण । भासा कुन्देन्दुशङ्खस्फटिकमणिनिभा भासमानाऽसमाना सा मे वाग्देवतेयं निवसतु वदने सर्वदा सुप्रसन्ना ॥२॥

सुरासुरसेवितपादपङ्कजा करे विराजत्कमनीयपुस्तका । विरिञ्चिपत्नी कमलासनस्थिता सरस्वती नृत्यतु वाचि मे सदा ॥३॥

सरस्वती सरसिजकेसरप्रभा तपस्विनी सितकमलासनप्रिया । घनस्तनी कमलविलोललोचना मनस्विनी भवतु वरप्रसादिनी ॥४॥

सरस्वति नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि ।

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