Sawan Somwar Vrat

सावन सोमवार व्रत – Sawan Somwar Vrat

Sawan Somwar Vrat 2020

सावन माह मे शिव के भक्त विश्वास तथा भक्ति के अनुसार शिव की उपासना करते हैं और अपने आराध्य भगवान शिव के लिए Sawan Somwar Vrat रखते है  । श्रावण माह मे शिव की भक्ति के महत्व का वर्णन ऋगवेद मे भी किया गया हैं। सावन महीने में चारों ओर का वातावरण शिव भक्ति से ओत प्रोत रहता हैं। सावन का यह माह शिवभक्ति और आस्था का प्रतीक माना जाता हैं। अतः भक्तो में श्रावण महीने का बहुत ही बेसब्री से इंतजार होता है Sawan ka somwar kab hai ये जानने की इच्छा होती है।

श्रावण महीने को सर्वोत्तम महीना कहा जाता हैं और हिन्दू धर्म मे सावन के महीने का बड़ा ही महत्व हैं।  क्योकि ऐसा लिखा है की सावन मास भगवान शिव को सबसे प्रिय हैं। इस महिने मे सावन सोमवार व्रत और सावन स्नान करने की परंपरा हैं, स्थान के पश्चात सावन महीने मे बेल पत्र से भगवान शिव की पूजा और जल चढ़ाकर उत्तम फल की प्राप्ति होती हैं। इस दौरान भक्त सावन सोमवार व्रत कथा भी सुनते है।  श्रावण के पावन मास में शिव भक्तों के द्वारा काँवर यात्रा का आयोजन किया जाता है।  सावन के महीने का प्रकृति से भी गहरा संबंध हैं क्योकि  इस महीने मे वर्षा ऋतु के होने से संपूर्ण धरती बारिश से हरी- भरी हो जाती हैं। सावन के महीने मे कई त्योहार भी मनाए जाते हैं। सावन के महीने मे सोमवार के दिन जो व्रत रखा जाता है उसे सावन सोमवार व्रत ( Sawan Somwar Vrat ) कहा जाता हैं।

सावन सोमवार मंत्र – Sawan Somwar Mantra

 ” ओम् नमः शिवाय ”  मंत्र का जाप करें।

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सावन सोमवार व्रत के प्रकार – Sawan Somwar Vrat Prakar

सावन सोमवार का व्रत तीन प्रकार से किया जाता हैं

1 ) पहला सोमवार   2 ) सौम्य प्रदोष व्रत   3 ) सोलह सोमवार व्रत

पहला सोमवार व्रत – Pahla Somwar Vart

सावन महीने के सोमवार के दिन जो व्रत किया जाता हैं उसे सावन सोमवार व्रत कहते हैं। ऐसा कहा जाता है की श्रावण सोमवार के पहले दिन व्रत करने से संतान सुख ,धन ,निरोगी, काया और मनोवांछित जीवन साथी प्राप्त होता हैं। Pahla Somwar Vart बहुत लोग करते है

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सोम प्रदोष व्रत – Som Pradosh Vrat

Som Pradosh Vrat से पहले यह जानना जरुरी है की प्रदोष काल क्या होता है। सूर्यास्त के बाद और रात होने से पहले के बीच जो अवधि होती हैं उसे प्रदोष काल ( Pradosh Kaal ) कहते हैं । सोम प्रदोष व्रत के दिन इसी समयावधि के दौरान विधिवत रूप से पूजा की जाती हैं तो वह अपने भक्त की सारी मनोकामना को पूर्ण करते हैं।

सोलह सोमवार व्रत – Solah Somwar Vrat

सभी महीनों मे से सबसे पवित्र महीना सावन मास को माना जाता हैं। इसलिए सोलह सोमवार व्रत को प्रारंभ करने के लिए यह बहुत ही शुभ समय माना जाता हैं। सावन के महीने मे लाखों श्रन्दालु ज्योर्तिलिंग के दर्शन के लिए हरिद्वार, काशी, उज्जैन, नासिक सहित भारत के कई धार्मिक स्थानों पर जाते हैं। Solah Somwar Vrat विशेष रुप से कुवांरी लडकियाँ अपने सुयोग्य वर प्राप्त करने के लिए करती हैं, भगवान शिव का शुभ आशीष पाने के लिए ये व्रत हर कोई भी कर सकता हैं।

सावन का सोमवार क्यों मनाया जाता हैं ?

माना जाता हैं कि सावन के महीने मे भगवान शिव की पूजा अर्चना करने से भक्तों की मनोकामनाएं अति शीघ्र पूर्ण हो जाती हैं। शास्त्रों के अनुसार, स्वयं भगवान शिव सृष्टि रचायिता ब्रम्हा के पुत्र नारद मुनि को सावन मास के महत्वाओ को बताते हुए कहते हैं कि उनके नेत्रो मे सूर्य,  दाहिने चन्द्र , वाम नेत्र औरतों, अग्नि मध्य नेत्र मे उपस्थित हैं।

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चन्द्रमा की राशि कर्क और सूर्य की सिहं होने के कारण जब सूर्य कर्क से सूर्य राशि तक की यात्रा करते हैं तो वह समय अत्यधिक शुभ माना जाता हैं इसलिए सावन का महीना बहुत शुभ होता हैं,इस कारण यह महिना शिव जी को काफी पंसद हैं। भगवान शिव की पूजा करने का यह सबसे उत्तम महीना होता हैं क्योंकि यह महीना अर्थात् सावन शिव को अत्यधिक प्रिय होता हैं।

इसके पीछे मान्यता हैं दक्ष पुत्री सती ने अपने जीवन को त्याग कर कई वर्षों तक श्रापित जीवन जीया और उन्होंने हिमालय राज के घर पार्वती के रुप मे जन्म लिया और भगवान शिव को अपने पति स्वरूप पाने के लिए पूरे सावन मास मे कठोर तप किया जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उनकी मनोकामनाँ को पूर्ण किया। कहा जाता हैं भगवान शिव को अपने पत्नी से पुनः मिलाप के कारण यह महीना उन्हें अत्यंत प्रिय हैं, इसी कारण इस महीने मे अविवाहित (कुमारी) अच्छे वर के प्राप्ति के भगवान शिव जी से प्रार्थना करती हैं।इस लिए सभी देशों मे प्रतिवर्ष सावन के महीने को बडे़ हर्षोल्लास ,उपवास ,पूजा -पाठ के साथ मनाया जाता हैं।

सावन सोमवार व्रत का महत्व – Sawan Somwar Vrat Ka Mahatva – Importance Of  Sawan Somwar Vrat

सावन सोमवार व्रत का महत्व का हिन्दू धर्म में बहुत महत्त्व है। सावन के महीने को देश के सभी लोग एक त्योहार व पर्व के रुप मे प्राचीन काल से मनाते आ रहे हैं । सावन मास हिंदी कैलेण्डर मे पाचवें स्थान पर आता हैं और इसे महिने मे वर्षा होना प्रारंभ होता हैं। भगवान शिव को श्रावण का देवता भी कहा जाता हैं। उन्हें इस महीने मे सभी जाति धर्म के लोग भिन्न-भिन्न तरीक़े से पूजते हैं। पूरे माह धार्मिक उत्सव होते है और विशेष तौर पर सावन में सोमवार को पूजा जाता हैं। भारत देश मे पूरे उत्साह के साथ सावन महोत्सव बड़े धूमधाम से मनाया जाता हैं।

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श्रावण का सोमवार का व्रत रखने से भगवान शिव को पूजा करने से व्यक्ति को समस्त सुखों की प्राप्ति होती हैं। इन दिनों किया गया दान पुण्य एवं पूजन समस्त ज्योतिलिर्गो के दर्शन समान फल देने वाला होता हैं। इस व्रत का पालन कई उद्देश्यो से किया जाता हैं। वैवाहिक जीवन की लम्बी आयु और सतांन की सुख – समृद्धि के लिए या मनोवांछित वर की प्राप्ति कराती हैं।

 

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