अशोक गहलोत हैं सियासत के 'जादूगर'

अशोक गहलोत हैं सियासत के ‘जादूगर’

राजस्थान: अशोक गहलोत…राजस्थान की राजनीति का वो कद्दावर चेहरा जिसका जादू मतदाताओं के सिर चढ़कर बोलता है। एक ऐसा नेता जो अपने सौम्य व्यवहार से न सिर्फ अपने समर्थकों का दिल जीत लेता है बल्कि विरोधी भी उनके अंदाज के कायल दिखते हैं। जिस सीट से वह विधानसभा चुनाव लड़ते हैं, वहां की जनता उन्हें हर बार सिर आंखों पर बिठाती है। पिता भले ही जादूगर थे, लेकिन वह राजनीति में रहकर लोगों पर जादू कर रहे हैं।
आज राजस्थान की राजनीति में वह कांग्रेस का सबसे बड़ा चेहरा हैं। जब हाईकमान को केंद्र में किसी भरोसेमंद चेहरे की तलाश थी तो ये तलाश उनके नाम पर ही आकर खत्म हुई थी। आज वह कांग्रेस के संगठन महासचिव हैं और अपनी जिम्मेदारी को बखूबी संभाल रहे हैं। प्रदेश की राजनीति में आज भी उनका पूरा असर है और इस बार भी वह सरदारपुरा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं।

अशोक गहलोत का स्वभाव बेहद सरल और सहज है। वह आम लोगों से जब मिलते हैं तो उनका कद उनके आड़े नहीं आता। उनका अंदाज ही लोगों को सहज कर देता है। उनमें कहीं भी एक बड़ा राजनेता होने का दंभ नहीं झलकता।
यह बात मशहूर है कि वह अपनी गाड़ी में साधारण पारले जी बिस्किट रखते हैं। कड़क चाय के वह बेहद शौकीन हैं। और जब भी चाय की तलब लगती है तो सड़क के किनारे कहीं भी गाड़ी रोककर चाय पी लेते हैं। उनका यहीं अंदाज जमीन से जुड़े नेता की छवि को और मजबूत करता है।

इसे अशोक गहलोत का जादू ही कहा जाएगा कि जिस राज्य में क्षत्रिय, जाटों और ब्राह्मणों का वर्चस्व हो, वहां माली जाति के इस नेता ने गहरी पैठ बना ली और दो बार राजस्थान का सीएम पद भी संभाला। 1998 में उन्होंने तमाम बड़े नेताओं की चुनौती के बीच सीएम पद संभाला। 2008 में भी उन्होंने अप्रत्याशित अंदाज में मुख्यमंत्री पद की कमान संभाली। आज वह ग्वालियर राजघराने की बेटी और झालावाड़ राजघराने की बहू वसुंधरा राजे के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर खड़े हैं। हाईकमान ने उन्हें भले ही पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी दी हो, लेकिन राजस्थान में वह एक बार फिर सीएम पद के प्रबल दावेदार हैं।
राजस्थान के युवा नेता और प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट की भी दावेदारी मजबूत है। अगर हाईकमान गहलोत को केंद्रीय राजनीति में ही रखने का फैसला लेता है तो सचिन पायलट के सिर ताज सज सकता है।

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