5 फरवरी को आजमगढ़ के सभी पीजी कॉलेज अंबेडकर मैदान में 13 प्वाइंट रोस्टर के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेंगे

5 फरवरी को आजमगढ़ के सभी PG कालेज के छात्र नेता, अम्बेडकर मैदान में करेंगे 13 प्वाइंट रोस्टर के विरोध

भारत में 13 प्वाइंट रोस्टर सिस्टम का विरोध बहुत जोर सोर से हो रहा है। वही 5 फरवरी को आजमगढ़ के सभी PG कालेज के छात्र नेताओ ने 13 प्वाइंट रोस्टर के विरोध करने का एलान कर दिया है । सभी छात्र – छात्रा अम्बेडकर मैदान में सुबह 10:00 AM बजे इस 13 प्वाइंट रोस्टर सिस्टम के विरोध करेंगे ।13 प्वाइंट रोस्टर इस नए प्रणाली का विरोध ना केवल छात्र बल्कि शिक्षक भी इसका विरोध बहुत जोरो से कर रहे है। छात्र नेता लालजीत यादव ने सभी कालेजो के छात्र – छात्राओं का आवाहन किया और 5 फरवरी को आजमगढ़ के अम्बेडकर मैदान में विरोध प्रदर्शन करने के लिए बुलाया है ।

क्या है 13 प्वाइंट रोस्टर ?

दरअसल बात ये है, 13 प्वाइंट रोस्टर सिस्टम यूनिवर्सिटी में आरक्षण लागू करने का नया तरीका है। इस रोस्टर सिस्टम को एससी-एसटी-ओबीसी आरक्षण सिस्टम के साथ ‘खिलवाड़’ बताया जा रहा है। अभी बवाल इसलिए मचा हुआ है, क्योंकि 200 प्वाइंट रोस्टर सिस्टम पर यूजीसी और मानव संसाधन मंत्रालय ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ याचिका दायर की थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 22 जनवरी, 2019 को खारिज कर दिया। इसी के साथ ही ये तय हो गया कि यूनिवर्सिटी में खाली पदों को 13 प्वाइंट रोस्टर सिस्टम के जरिए ही भरा जाएगा।

  • चौथा, आठवां और बारहवां कैंडिडेट OBC होगा, मतलब कि एक ओबीसी कैंडिडेट डिपार्टमेंट में आने के लिए कम से कम 4 वैकेंसी होनी चाहिए.
  • 7वां कैंडिडेट एससी कैटेगरी का होगा, मतलब कि एक एससी कैंडिडेट डिपार्टमेंट में आने के लिए कम से कम 7 वैकेंसी होनी ही चाहिए
  • 14वां कैंडिडेट ST होगा, मतलब कि एक एसटी कैंडिडेट को कम से कम 14 वेकेंसी इंतजार करना ही होगा
  • बाकी 1,2,3,5,69,10,11,13 पोजिशन अनारक्षित पद होंगे.

अब एक और आंकड़ा देखकर आपको हैरानी हो सकती है. यूं तो देश के 40 केंद्रीय विश्वविद्यालयों में आरक्षण लागू होता है. लेकिन इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश की इन यूनिवर्सिटी में 95.2% प्रोफेसर, 92.9% असोसिएट प्रोफेसर, 66.27% असिस्टेंट प्रोफेसर जनरल कैटेगरी से आते हैं. इनमें SC, ST और OBC के वो उम्मीदवार भी हैं, जिन्हें आरक्षण का फायदा नहीं मिला है

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ये देखते हुए ये बात साफ है कि यूनिवर्सिटी में आरक्षण की पूरी प्रणाली ही खत्म कर देने के लिए ये सिस्टम बनाया गया है। एक यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट को शुरू करने के लिए 2 असिस्टेंट प्रोफेसर, एक असोसिएट प्रोफेसर और एक प्रोफेसर होना चाहिए। मतलब कुल संख्या 4-5। SC-ST-OBC को आरक्षण देने के लिए इतनी वैकेंसी कहां से लाई जाएगी? देश में शायद ही कोई ऐसी यूनिवर्सिटी हो, जहां एक डिपार्टमेंट में एक साथ 14 या उससे ज्यादा वेकेंसी निकाली जाती हो। मतलब ओबीसी-एससी का हक मारा जा रहा है, एसटी समुदाय के रिजर्वेशन को तो बिलकुल खत्म कर देगी ये प्रक्रिया।

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