पांच राज्यों में रैलियों का फायदा किसको, राहुल को या पीएम मोदी को

पांच राज्यों में रैलियों का फायदा किसको, राहुल को या पीएम मोदी को

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव 2019 से पहले सेमीफाइनल माने जा रहे पांच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनाव के परिणाम को जानने की बेसब्री न सिर्फ राजनीतिक पार्टियों को है, बल्कि आम लोगों में भी है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और मिजोरम में वोटिंग का दौर खत्म है और आज दो राज्यों राज्सथान और तेलंगाना में वोटिंग भी ख़त्म हो गई है, 2019 से पहले सेमीफाइनल के तौर पर देखे जाने वाले इस चुनाव के लिए कांग्रेस और बीजेपी में कांटे की टक्कर है। मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से लगातार हार का मुंह देख रही कांग्रेस के लिए जीत की पटरी पर लौटने का वक्त है, तो वहीं बीजेपी जीत का लय कायम रखना चाहती है।

इन पांच राज्यों के लिए राहुल गांधी और पीएम मोदी ने पूरी ताकत झोंकी और अपनी-अपनी पार्टियों के पक्ष में वोट जुटाने के लिए जमकर रैलियां कीं पांचों राज्यों के विधानसभा चुनाव में हुई रैलियों पर नजर डालें तो पीएम मोदी ने करीब 32 रैलियां की हैं, वहीं राहुल गांधी ने 82 जनसभाओं को संबोधित किया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बार 5 राज्यों में होने हो रहे विधानसभा चुनावों सबसे ज्यादा रैलियां राजस्थान में की। पीएम मोदी ने राजस्थान में 12 सभाओं को संबोधित किया। अगर आंकड़ों पर गौर करें तो पीएम मोदी ने राजस्थान में 12, मध्यप्रदेश में 10, छत्तीसगढ़ में 4, तेलंगाना में 5 और मिजोरम में एक रैली को संबोधित किया ।

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हालांकि, रैलियों के मामले में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी काफी आगे रहे हैं। राहुल गांधी ने पांच राज्यों के लिए करीब 82 रैलियों को संबोधित किया। यह पीएम मोदी की रैलियों से दोगुने से भी अधिक है। यानी राहुल गांधी के लिए इन पांच राज्यों में कांग्रेस के लिहाज से करो या मरो वाली स्थिति है। यही वजह है कि राहुल ने ताबड़तोड़ रैलियां कीं। मिजोरम और तेलंगाना को अलग रख भी दें तो राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में सबसे अधिक रैलियां कीं। राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश में 25, राजस्थान में 19, छत्तीसगढ़ में 19 , तेलंगाना में 17 और मिजोरम में 2 रैलियों को संबोधित किया।

हालांकि जिस तरह से इन पांच राज्यों में राहुल गांधी ने पीएम मोदी से भी अधिक ताबड़तोड़ रैलियां की हैं, उससे यह स्पष्ट है कि राहुल ने गुजरात के परिणाम से सबक ली है और ताबड़तोड़ रैलियां कर कांग्रेस के पक्ष में हवा का रुख करने की कोशिश की है। खैर, जब 11 दिसंबर को चुनाव के परिणाम आएंगे तो तस्वीर साफ हो जाएगी कि आखिर राहुल गांधी की इन चुनावी रैलियों का असर हुआ या नहीं, या फिर पीएम मोदी कम रैलियों में ही बाजी मार गए।

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