jane kb hai bhai duj aur shubh muhurt

jane kb hai bhai duj aur shubh muhurt

जानिए कब है भाई दूज(bhai duj 2019), शुभ मुहूर्त और कैसे करे बहने इस पर्व पर पूजा ?

पांच दिनों तक चलने वाला दीपाली का त्यौहार का सबसे आखिरी और अंतिम यानी पांचवे दीन भाई दूज का त्यौहार मनाया जाता है। भाई दूज कार्तिक मास की शुक्ल पछ की द्वितीय तिथि को मंगलवार 29 अक्टूबर को है। भाई दूज की तिलक मुहूर्त -13 :11 से 15:23 बजे तक (29 अक्टूबर )

द्वितीया तिथि प्रारम्भ -समाप्त -21 :07 बजे से लेकर 21 :20 बजे तक

भाई दूज- भाई बहन के रिश्ते पर आधारित है। रक्षाबंधन के समान मनाया जाने वाला भाई दूज पर्व कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है ,इसे “यम द्वितीया” के नाम से भी जाना जाता है। भाई दूज दीपावली के दो दिन बाद और गोवेर्धन पूजा के एक दिन बाद मनाया जाता है। भाई दूज के दिन बहाने अपने भाइयों के खुशियों के लिए कामना /प्रार्थना करती है। जो भाई के प्रति बहन का अगाध प्रेम को व्यक्त करता है।

ऐसे करे भाई दूज की पूजा विधि (bhai duj ki puja vidhi)

  • सबसे पहले बहनों को चावल के आटा का चौक तैयार करना चाहिए।
  • चौक तैयार करने के बाद भाई को चौक पर बैठाए फिर उसके हाथों की पूजा करे।
  • उसके बाद भाई के हथेली पर आप चावल का घोल बनाये।
  • उसके बाद सिंदूर लगाकर पान , सुपारी, पैसा, कोई फूल आदि हाथों पर रखकर धीरे धीरे हाथों पर पानी छिड़कते हुए मंत्र बोले।
  • कुछ अस्थानो पर इस दिन बहाने अपने भाइयों की आरती उतारकर उनके हाथों में कलावा बांधती है
  • भाई का मुँह मीठा करने के लिए भाइयों को मिश्री या मिठाईयां खिलानी चाहिए।
  • भाई दूज के दिन शाम को बहाने यमराज के नाम से चौमुख दिया जलाती है। और घर के बहार दीपक का मुख घर के दक्षिण दिशा की ओर रखना चाहिए।

भाई दूज(bhai duj) की पौराणिक कथा(pauranik katha)

सूर्यदेव की पत्नी छाया की गर्भ से यमराज तथा यमुना का जन्म हुआ। यमुना अपने भाई यमराज से स्नेहवश निवेदन करती थी कि वे उसके घर पधारे और भोजन करें। लेकिन यमराज व्यस्त होने  के कारण यमुना की बात को टाल जाते थे।

कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यमुना अपने द्वार पर अचानक यमराज को खड़ा देखकर बहुत खुश हुई। प्रसन्नचित्त हो भाई का स्वागत किया तथा भोजन करवाया। इससे प्रसन्न होकर यमराज ने बहन से वर माँगने को कहा। तब बहन ने भाई से कहा कि आप प्रतिवर्ष इस दिन मेरे यहां भोजन करने आया करेंगे तथा इस दिन जो बहन अपने भाई को टीका करके भोजन खिलाए उसे आपका भय न रहे। यमराज ‘तथास्तु’ कहकर यमलोक चले गए।
ऐसा माना जाता है कि जो भाई -भाई दूज के दिन यमुना में स्नान करके पूरी श्रद्धा से बहनों के आतिथ्य को स्वीकार करते हैं उन्हें तथा उनकी बहन को यम का भय नहीं रहता।

तिलक लगाते समय पढ़ें इस मंत्र को

गंगा पूजे यमुना को, यमी पूजे यमराज को,

सुभद्रा पूजे कृष्ण को,

गंगा यमुना नीर बहे मेरे भाई आप बढ़ें, फूले-फलें

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