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About Magha Purnima | Magha Purnima 2020 date

Magha Purnima Vrat, importance, Puja vidhi, magh purniam 2020 date.

माघ पूर्णिमा जो माघ महीने में आती है जिसे माघी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। प्रयाग त्रिवेणी संगम में लगने वाला प्रसिद्ध कुंभ मेला और माघ मेले के दौरान स्नान करना बहुत मंगलकरी है।
माघी महीने का आखिरी और सबसे शुभ दिन माघी पूर्णिमा है। यह उत्तर भारत में माघ महीने के समापन का प्रतीक है। माघ पूर्णिमा के दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु की पूजा की जाती हैं। माघ पूर्णिमा के अवसर पर नदी में स्नान करना पवित्र मन जाता हैं।

माघ पूर्णिमा कब है २०२० ?

माघ पूर्णिमा डेट ९ फरवरी 2020 रविवार के दिन।

importance of Magh purnima

माघ पूर्णिमा को ‘स्नान पर्व’ भी बोल सकते है क्योंकी इस दिन गंगा नदी में स्नान करने का धार्मिक महत्व jisse vishesh fal की prapti hoti है। पौष पूर्णिमा से माघ पूर्णिमा तक log पवित्र नदियों में स्नान करते हैं।  here is list of Purnima vrat dates 2020. इस दिन पवित्र नदियों jaise की गंगा, जमुना, कावेरी, कृष्णा, नर्मदा, तापी, और कई अन्य स्थानों pr पर्व मनाए जाते हैं। माघ पूर्णिमा पर पुष्कर सरोवर राजस्थान में, कन्याकुमारी समुद्र और रामेश्वरम में स्नान का भी धार्मिक महत्व है।

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यह दिन बौद्ध धर्म ke logo me में भी विशेष महत्व रखता है। ऐसा माना जाता है कि गौतम बुद्ध ने इसी दिन अपनी मृत्यु के बारे में बताया था। बौद्ध विहारों में धार्मिक उत्सव योजित होते हैं। माघ पूर्णिमा प्रार्थना बुद्ध को समर्पित है, त्रिपिटक से पवित्र छंद का जप किया जाता है।

Magh Punrima kahani

ब्रह्मवैवर्त पुराण जो की वेदमार्ग का दसवाँ पुराण है, के अनुसार भगवान विष्णु माघ महीने के दौरान गंगा नदी में निवास करते हैं, इसलिए इस nadiyo के पवित्र जल में स्नान करने से सभी पापों ka नाश हो सकता है। यह भी माना जाता है कि mahan ऋषि विश्वामित्र ji ने माघ पूर्णिमा के दिन 2382 ईसा पूर्व कुंभ मेले के दौरान पवित्र स्नान किया था। ज्योतिषीय रूप से भी माघ पूर्णिमा को एक vishesh दिन माना जाता है क्योंकि सूर्य मकर राशि में और चंद्रमा कर्क राशि में होते है। इसलिए इस din स्नान or पूजा पथ, दान पुण्य से सूर्य और चंद्रमा से संबंधित सभी समस्याएं door हो jati हैं।

माघ पूर्णिमा अनुष्ठान / समारोह – Magh Punrima Importance

  • श्रद्धालु व्रत rakhe एवं पूजा पाठ करते है,
  • पूर्वजों का सम्मान एवं dan पुण्य करते है
  • प्रयाग में संगम पर स्नान करते हैं।
  • भगवान विष्णु की पूजा की जाती है
  • सत्यनारायण व्रतम मनाया जाता है।
  • भगवान विष्णु को सिंदूर, तिल, फल, सुपारी, केले के पत्ते, सुपारी और मौली अर्पित की जाती है।
  • पंचामृत गंगा जल, शहद, दूध, तुलसी और मिठाई से बनता है।
  • पंजीरी प्रसाद जो की गेहूं और चीनी से तैयार किया जाता है, भगवान को arpit kiya जता है।
  • भगवान शिव, भगवान ब्रह्मा और देवी लक्ष्मी की भी पूजा की जाती है।
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