Makar-sankranti story and Significance

Makar Sankranti Story and Significance

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मकर संक्रांति साल का पहला त्यौहार बड़ा महत्वपूर्ण है। मकर संक्रांति के दिन सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण में प्रवेश करता है। सूर्य का उत्तरायण होना शुभकारी माना जाता है।
इस वर्ष 14 जनवरी को मकर संक्रांति मनाई जाएगी। हिंदी धर्म के अनुसार सूर्य देव इस दिन धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं। मकर संक्रांति के दिन स्नान का बड़ा महत्व है। इस दिन लाखों लोग प्रयागराज संगम और अन्य पावन नदियों में स्नान को अपने लिए मंगलकारी मानते है मकर संक्रांति के दिन दान, धर्म का भी विशेष फल मिलता है।

मकर संक्रांति से जुड़ी कहानी

हिंदू धर्म की मान्यताओं और कथाओ के अनुसार भगवान विष्णु ने मकर संक्रांति के दिन पृथ्वी लोक से असुरों का नाश कर उनके सिरों को काटकर मंदरा पर्वत पर गाड़ दिया था। तभी से पृथ्वी लोक के उद्धार और भगवान विष्णु की इस जीत को मकर संक्रांति के रूप में मनाया जाने लगा।
एक और कथा के अनुसार भगवान श्री कृष्ण ने कहा है कि, जो मनुष्य मकर संक्रांति पर देह का त्याग करता है उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है, और वह मनुष्य जीवन-मरण के चक्कर से मुक्त हो जाता है।

मकर संक्रांति से जुड़ी महत्वपूर्ण बात

मकर संक्रांति से ही मौसम में परिवर्तन होने लगता है। सर्दी के जाने और बसंत ऋतू की शुरूवात हो जाता है। इसके फलस्वरूप प्रकृति और मानव दोनों पर इसका असर दीखता है। दिन लंबे होने लगते हैं और रातें छोटी हो जाती है।

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मकर संक्रांति का एक और रूप – पोंगल

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